हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह सय्यद मुहम्मद सईदी ने क़ुम मुकद्दसा में नमाज़-ए-जुमा के खुत्बों में कहा कि इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत के अवसर पर अपने संदेश में युवाओं को ईरान के भविष्य के निर्माण के लिए ज्ञान प्राप्त करने, अपनी पहचान बनाए रखने और देश की प्रगति में भूमिका निभाने की जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान उस समय वास्तविक शक्ति बनता है, जब उसके साथ नैतिकता भी हो। नैतिकता से रहित ज्ञान मानवता के लिए नुकसानदायक हो सकता है, जबकि ज्ञान और नैतिकता का मेल समाज के निर्माण तथा दुश्मनों के सामने एक मजबूत बाधा बन सकता है।
राष्ट्रपति पिज़िश्कियान का भाषण प्रशंसनीय है
आयतुल्लाह सईदी ने संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति पिज़िश्कियान के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि ईरान आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति ने अपने भाषण में केवल कूटनीतिक अंदाज अपनाने के बजाय दस्तावेजों और सबूतों के साथ ईरानी राष्ट्र का पक्ष दुनिया के सामने रखा।
उन्होंने राष्ट्रपति पिज़िश्कियान के इस बयान को भी महत्वपूर्ण बताया कि इज़राइल के पास परमाणु बम मौजूद है, जबकि परमाणु निरीक्षक ईरान में मौजूद हैं। उनके अनुसार, यह भाषण ईरानी राष्ट्र के अनुभवों और उसके प्रतिरोध के संकल्प को दर्शाता है।
पवित्र रक्षा का सबक प्रतिरोध है
इमामे जुमा क़ुम ने सप्ताह-ए-दिफ़ा-ए-मुक़द्दस के अवसर पर कहा कि आठ वर्षीय पवित्र रक्षा और हालिया युद्धों के अनुभवों से स्पष्ट होता है कि दुश्मन और युद्ध के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन ईरान की स्वतंत्रता, सम्मान और संप्रभुता की रक्षा के लिए जनता का संकल्प कायम रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध का मैदान और तरीका बदल गया है, लेकिन दुश्मनों की साजिशें समाप्त नहीं हुई हैं।
आयतुल्लाह सईदी ने बेपर्दगी को शरीअत और राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि अनजाने में इस कार्य में शामिल लोगों को उचित तरीके से जागरूक किया जाना चाहिए, जबकि उनके अनुसार जो लोग जानबूझकर राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाते हैं, उनके साथ कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
उन्होंने आयतुल्लाह उज़्मा सय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर सर्वोच्च नेता के शोक संदेश का उल्लेख करते हुए दिवंगत मरजा-ए-तक़लीद की विद्वता, शोध और गहरी दृष्टि रखने वाले व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने सय्यद हसन नसरुल्लाह की शहादत की बरसी के अवसर पर कहा कि प्रतिरोध किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक रास्ता और विचारधारा है और यह सिलसिला जारी रहेगा।
क़ुरआन की अधिक से अधिक तिलावत करने पर जोर
आयतुल्लाह सईदी ने पहले खुत्बे में तक़वा को मजबूत करने के लिए अल्लाह को अधिक से अधिक याद करने, मौत को याद रखने, क़ुरआन की अधिक तिलावत करने और पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद (स) पर अधिक से अधिक दरूद भेजने पर जोर दिया।
उन्होंने सूरह फ़त्ह की आयत “मुहम्मदुर रसूलुल्लाह वल्लज़ीना मआहू” की व्याख्या करते हुए कहा कि रसूलुल्लाह (स) के साथ होने का अर्थ केवल बाहरी या ऐतिहासिक साथ होना नहीं है, बल्कि ईमान, नैतिकता, अक़ीदा और अमल में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का अनुसरण करना है।
उनके अनुसार, जो समाज पैग़म्बरे इस्लाम (स) की रिसालत को अपनी वैचारिक और व्यावहारिक बुनियाद बनाता है, वह मतभेदों से निकलकर एकता की ओर बढ़ सकता है।
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